गांधी के बेटे ही गांधी के हत्यारे हैं॥

June 9th, 2007

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गांधी के नामों पर केवल गांधी के जयकारे हैं।
गांधी के बेटे ही गांधी के असली हत्यारे हैं॥

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देह मरण धर्मा है कहती युग युग से ये गीता है।
जीना उसका ही जीना जो कि विचार से जीता है॥
नत्थुराम ने केवल गांधीजी के तन को खत्म किया।
पर उनके भक्तों ने उनके आदर्शों को हजम किया॥
देश बना है नर्क ये बापू जब से स्वर्ग सिधारे हैं।
गांधी के बेटे ही गांधी के असली हत्यारे हैं॥
वे गाते थे राम नाम ये सब उससे कतराते हैं।
वे कहते थे माता उन गायों को ये कटवाते हैं॥
लिये स्वदेशी भाव गये थे बापू नमक बनाने को।
ये आतुर हैं नमक विदेशी कम्पनियों का खाने को॥
इन नकली भक्तों ने ही डंकल के पांव पखारे हैं।
गांधी के बेटे ही गांधी के असली हत्यारे हैं॥
बापू की झोली का रद्दी माल बिका था सोने में।
जनता ने अब जान लिया तो फेंक दिया है कोने में॥
हुई गोडसे की गल्ती जो मारा मरे मराये को।
अमर बनाकर पुजवा डाला अपनों से ठुकराये को।
गांधी के जन्मों का कारण नत्थू की तलवारें हैं।
गांधी के बेटे ही गांधी के असली हत्यारे हैं॥
काँग्रेस को खतम करो ये गांधी की अभिलाषा थी।
पूरी इच्छा होगी उनकी बेटों से ये आशा थी॥
पर बेटों ने उनके नाम पे सेंकी रोटी वोटों की।
राम छोड़ सुखराम बने शैया अपनाई नोटों की॥
पहन लँगोटी त्याग भाव से जीवन जिसने बिता दिया,
उसके नाम पे अब अरबों-खरबों के वारे न्यारे हैं।
गांधी के बेटे ही गांधी के असली हत्यारे हैं॥
गाँधी की जय कहते आये हैं जो नेता बरसों से।
कितना इनने रखा वास्ता बापू के आदर्शों से ?
कहने को कहते आये हैं जो गाँधी को राष्ट्रपिता।
उनके आदर्शों की ये ही लोग जलाते रहे चिता॥
पढ़ो जरा इतिहास इन्हीं के कारण बापू रोते थे
काँग्रेस के द्वारा वे हर बार गये दुत्कारे हैं।
गांधी के बेटे ही गांधी के असली हत्यारे हैं॥
दारू के ठेकों पर गांधीजी धरने दिलवाते थे।
दारूबंदी को स्वराज्य का मुख्य अंग बतलाते थे।
पर अब गाँधी के बेटे दारू का धंधा करते हैं।
दारू और दारा के द्वारा राजनीति ये करते हैं।
प्रजातंत्र की गर्दन जिनने चौराहे पर काटी है,
लालू की खातिर ढकलाते वही अश्रु के धारे हैं।
गांधी के बेटे ही गांधी के असली हत्यारे हैं॥

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